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संपादक की ओर से

सभी पाठकों को नमस्कार !


आप सभी को नव वर्ष २०२६ की हार्दिक शुभकामनाएं ! साल आपके लिए अच्छी सोच और पुण्यों का भंडारा लेकर आये। 


मुझे उम्मीद है कि आपको घुड़सवार का यह अंक पसंद आएगा। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, घुड़सवार के नाम का विस्तार हो रहा है, और मुझे और ज़्यादा सबमिशन मिल रहे हैं। इसका मतलब है यह कि हिंदी सबमिशन के लिए, जो अब बहुत ज़्यादा हो गए हैं, कभी-कभी मुझे जवाब देने में ३ से ४ महीने भी लग जाते हैं ! हालांकि, यह बेहद ख़ुशी की बात है: पत्रिका का हिंदी खंड भारत के छोटे शहरों तक भी और बहुत कच्ची उम्र की पीढ़ी तक भी पहुँच रहा है, और यह इस पत्रिका को शुरू करने के पीछे मेरे मुख्य मक़ासिद में से एक था।


इस बार संपादक की तरफ़ से कोई समझदारी वाली बात करने की गुंजाइश नहीं है ! मैं अन्य काम में इतना व्यस्त हूँ कि यह अंक पहले ही कुछ दिनों की देरी से आ रहा है ! लेकिन मुझे उम्मीद है कि कविताओं का चुनाव आपको पसंद आएगा ! भले ही अनुवाद के ऐप्स किसी कविता के साथ न्याय नहीं कर सकते, फिर भी मैं उन हिंदी पाठकों को, जो ज़्यादा अंग्रेज़ी नहीं बोलते, प्रोत्साहित करता हूँ कि वे अंग्रेज़ी की कविताओं को भी पढ़ें, चाहें अनुवाद करके ही सही। इस तरह का पर-परागण आपको एक भिन्न साहित्यिक दुनिया की झलक दिखलायेगा और आपके लिए प्रेरणादायी हो सकता है।


आखिर में, इस अंक में हुई किसी भी ग़लती या मुद्रण की त्रुटि के लिए मैं क्षमा चाहता हूँ। साथ ही, मुझे समय मिलने पर डिज़ाइन पर थोड़ा काम करने की ज़रूरत है, क्योंकि मुझे लगता है कि कभी-कभी वेबसाइट पर कुछ खण्डों के नाम पढ़ने में मुश्किल हो सकती है, लेकिन मुझे आश्वासन है कि स्वयं रचनाएं पढ़ने में कोई दिक़्क़त नहीं आएगी। 


प्रणाम,


अंकुर अग्रवाल

संपादक, घुड़सवार साहित्यिक पत्रिका


२ जनवरी २०२६, लिल्लेस्त्र्यम, नॉर्वे

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