
कर्ण गौतम
कर्ण गौतम भारत के हिमाचल प्रदेश नामक राज्य के हमीरपुर जिले के निवासी हैं| गाँव का नाम है किटपल। इसका श्रेय अपने इष्ट देव गोगा जाहर वीर जी को देते हैं।
सबकी एक ही कहानी
देखो यह सब क्या हो रहा है...?
एक व्यक्ति आधुनिकता के नाम पर अपना गाँव छोड़ रहा है,
उस गाँव को छोड़कर वह शहर में अपने गाँव को खोज रहा है,
देखो यह क्या हो रहा है...
कोई उससे पूछे अरे गाँव को छोडकर गाँव को ही क्यों खोज रहा है?
उत्तर मिला…
कि वह गाँव को नहीं, गाँव के जनों को खोज रहा है,
जनों में यादों को खोज रहा है,
उन यादों में छिपी उन बातों को खोज रहा है,
उन बातों में भी प्रेम को ढूंढ रहा है,
उस प्रेम में भी माता-पिता, भाई-बहनो, सगे-संबंधियों को खोज रहा है,
देखो यह क्या हो रहा...
अरे उससे कोई पूछे…
कि उनको खोज रहा है तो यहाँ शहर में क्यूँ डोल रहा है?
कुछ पल की शांति…
और कोई उत्तर न मिला…
कुछ पल सोचने के बाद…
यहाँ मैं नौकरी के लिए डोल रहा हूँ,
उस नौकरी को मैं पैसे से तोल रहा हूँ,
उस पैसे से मैं माता-पिता और सगे-संबंधियों का प्रेम मोल रहा हूँ |
अरे ! फिर कोई उससे पूछे… कि
क्या नौकरी के चक्कर में तू अपने माता-पिता को छोड़ रहा है?
क्या उनको छोड़कर उनके प्रेम को भूल रहा है?
क्या उनके प्रेम को भुला कर अपने कर्तव्यों से मुँह मोड़ रहा है?
क्या तू नए को पाने के लिए पिछले को छोड़ रहा है?
देखो यह क्या हो रहा है?
इसका कोई उत्तर न मिला...
फिर उससे कोई पूछे…
क्या माता-पिता को छोड़कर तू कुछ पाएगा?
अगर तू कुछ पाएगा तो किसको बतायेगा?
अगर किसी को बतायेगा तो क्या तू फिर से वही प्रेम पायेगा?
उस प्रेम को पा कर क्या फिर तू उसे ठुकराएगा ?
अगर प्रेम को ठुकराएगा तो तेरा ऐसा पैसा किस काम आएगा?
देखो यह क्या हो रहा है...
देखो यह क्या हो रहा है...