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डॉ. लक्ष्मी एन. गोपराजू

डॉ. लक्ष्मी ऐन. गोपराजू एक पर्यावरणविद, सुदूर संवेदन वैज्ञानिक हैं जो जंगल एवं पारिस्थितिकी का अध्ययन करती हैं। यह खाली समय में बच्चों के लिए कहानियां, विज्ञानं सम्बन्धी लेख इत्यादि लिखना पसंद करती हैं। 

इनकी परवरिश प्रयागराज में हुई, और यह महादेवी वर्मा, प्रेमचंद आदि लेखकों से काफी प्रभावित रही हैं। इन्हें महादेवी जी की रचनाएं बहुत पसंद है। झारखंड में प्रभात खबर अखबार में भी इनके लेख छपे हैं। हिंदी भाषा से प्रेम है, और यह अपनी रचनाओं से बच्चों को कई विषयों में जगरूप करना चाहती हैं। 

बेकार की बातें

आप रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं


गाड़ी का इंतज़ार कर रहे हैं, अख़बार पढ़ रहे हैं


इतने में अगर कोई आकर यह ना पूछे


भाईसाहब, ज़रा बीच का पन्ना देंगे,


तो आपका अखबार बेकार है।


 


आप सब्ज़ी-बाजार में सब्ज़ियां ख़रीद रहे हैं


लाल-लाल टमाटर छांट रहे हैं


इतने में अगर कोई आकर यह ना पूछे


भाईसाहब, ज़रा टाइम बताएँगे,


तो आपकी घड़ी बेकार है।


 


आप बैंक से पैसे निकाल रहे हैं,


नये-नये नोट गिन रहे हैं


इतने में अगर कोई आकर यह ना पूछे


भाईसाहब, ज़रा पेन देंगे,


तो आपका कीमती पेन बेकार है।


 


आप पान की दुकान पर खड़े हैं,


क्रिकेट कमेंट्री सुन रहे हैं


इतने में अगर कोई आकर यह ना पूछे


भाईसाहब, स्कोर क्या है,


तो आपका रेडियो बेकार है।


 


आप किसी के यहाँ भोज पर गये हैं


श्रृंगार रस में रंग कर,


इतने में अगर कोई आकर यह ना पूछे


बहनजी, आपका यह हार कितने का है,


तो आपका नौ लाख हार भी बेकार है।


 


दोस्तों ये सब बेकार की बातें हैं,


परंतु यह हमारे जीवन की झांकी है,


अगर यह सब भी ना होता तो,


हमारा जीवन बेकार होता।

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