
नलिन ओम भट्ट
नलिन ओम भट्ट एक उभरते हुए द्विभाषी (अंग्रेजी, हिंदी के) लेखक और कवि हैं। उनके काम को विभिन्न साहित्यिक ई-ज़ीन, ऑडियो प्लेटफ़ॉर्म और वेबसाइटों में प्रस्तुत किया गया है। नलिन साहित्य और लेखकों को बढ़ावा देने के लिए एक साहित्यिक सोशल मीडिया चैनल के साथ भी काम कर रहे हैं। वर्ष २०२४ में उन्होंने अपना पहला हिंदी कविता संग्रह, स्ट्रीट लाइट, प्रकाशित किया।
इंस्टाग्राम - @thehappiestman_alive55
मैं समेट लूंगा और जला दूंगा
मैं समेट लूंगा सब स्मृतियाँ अतीत की, जिनमें मुझे प्रेम प्राप्त हुआ था
जब मुझे समझा गया था, जब किसी ने कहा था मुझसे कि वह मुझसे प्यार करती है
जब किसी ने कहा था कि मैं अद्वित्य हूँ, विलक्षण हूँ, नेक हूँ, विशेष हूँ, सच्चा हूँ, सुंदर हूँ जैसा हूँ
जब किसी के साथ बीते थे पल साझा समझ, स्नेह, हर्ष, मस्ती, मज़ाक के
जब बैठकर दो लोगों ने अपना-अपना दुख साझा किया था
जब किसी के साथ मैं एक हुआ था, जब मेरा “मैं” कहीं खो गया था
जब मैंने कुछ सुंदर देखा, पढ़ा सुना, या जाना था
जब मुँह से अहा! का उद्गार हुआ, जब कामुक कराह की आह! निकली थी
जब मैं किसी के काम आया था, जब मुझमें प्रेम, दया, करुणा जगी थी
जब किसी ने मुझे प्रेम से देखा था, जब किसी ने मुझे अपना माना था
जब मैं मेरी नज़र में बड़ा हुआ, जब मुझे कुछ मनचाहा प्राप्त हुआ
जब मैंने मुझे स्वीकार किया, जब मैं निमित्त बना किसी का दुःख हरने में
जब मैं किसी भूखे को खाना खिला सका, जब किसी नन्ही बच्ची की मासूम आँखों ने मुझे पिघला दिया
जब किसी कुकुर ने मुझे पूरे दिन याद किया, जब खेल-खेल में दिन बीत गए, जब खिलौनों से खेलते रहे
जब किसी कहानी का किरदार मेरे जैसा लगा, किसी गाने के बोल अपने लगे
जब किसी चलचित्र का मुख्य किरदार मैं बना
जब मुझे ज्ञात हुआ, कि मैं नायक हूँ मेरी कहानी का
जब लगा कितना असाधारण हूँ, जब जाना कितना साधारण हूँ
जब देखा सब एक से हैं, जब देखा भाईचारा
जब जाने नशे के लुत्फ, की पूजा-वंदना, जानी सार्थकता निर्थकता में
जब जाना कारणों के कारणों को, जब जाना मैं कर्ता नहीं हूँ, जब जाना मैं हूँ तो दिव्य हूँ
मैं समेट लूंगा इनको और जला दूंगा स्मृतियों की उस सूची को जिनमें इन जैसों के विलोम निहित हैं
भूल जाऊंगा वे दर्द, व्यथा, दुविधा, डर और कहूंगा उसे मेरा दिव्य स्वरूप, मेरा इष्ट, स्वयं मैं - ब्रह्माण्ड ।

