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प्रणव राज

प्रणव राज बिहार के रहने वाले हैं । वह अभी दसवीं कक्षा में पढ़ते हैं । इनकी साहित्य में बहुत रूचि है, और लिखने का भी शौक रखते हैं । इन्होंने अभी तक ३५ हिंदी कविताएं, ५ व्यंग, १ सामाजिक कहानी और १४ अंग्रेज़ी कहानियां लिखी हैं । इनकी एक अंग्रेज़ी कहानी एक पत्रिका में दाखिल हो चुकी है । साथ ही दो हिंदी कविताएं प्रभात खबर में प्रकाशित हो चुकी हैं, और क्लाउड ९ में एक अंग्रेज़ी कविता भी प्रकशित हुई है। इनकी कविताएं अकेलेपन, प्रकृति आदि पर आधारित है। इन्होंने हमेशा से लेखक बनने का सपना बुना है।  

ज़िंदगी की यात्रा

सुबह हुई, आंखें खुली,

तो बिस्तर पर था,

कंबल में लिपटा हुआ,

मां के बगल में ।


न दुनियादारी की समझ,

ना ज़िंदगी की,

हंसता, रोता, गिरता, चलता,

चलते-चलते दोड़ना सीखा ।


दौड़ते- दौड़ते कब स्कूल पहुंचा,

दोस्त बने, यारी हुई,

जब दोपहर हुई,

तब बरबादी हुई ।


दोस्तो ने छोड़, दिल को तोड़ा,

उनकी यादें आईं,

पर मैंने यादों को दफ़नाया,

फिर ज़िंदगी की गाड़ी चली ।


मां की लोरी गई,

पापा की डांट गई,

रिश्तेदारों की चिंता गई,

शाम का समय आया ।


आंगन में बैठे ,

चाय की चुस्की लिए,

मैंने ढलते हुए सूरज को देखा,

फिर अपनी मौत को ।

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