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शिवानी यादव
शिवानी हिंदी व अंग्रेजी काव्य में रुचि रखती हैं। साहित्य में अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात लखनऊ विश्वविद्यालय से वह अब Ph.D. कर रहीं हैं। वह संगम नगरी प्रयागराज की रहने वाली हैं। दर्शन और साहित्य, उनके पसंदीदा विषय हैं। अपने खाली समय में शिवानी साहित्य पढ़ना पसंद करती हैं। भारतीय दर्शन के माध्यम से वह अपनी ही खोज में लगी रहतीं हैं।
कुछ हुआ क्या?
कुछ हुआ क्या?
किसी ने छुआ क्या?
वहीं एक सन्नाटे वाली गली से निकलेगी तो यही होगा न,
न जाने कितना समझाया,
कोई माना क्या?
"अपनी इज़्ज़त अपने हाथ में होती है"
सुन लिया काफ़ी बार मैंने,
मेरी सुनी किसी ने?
बस इल्ज़ाम थोप दिया,
मैं अपनी इज़्ज़त संवार लूंगी,
उन मर्दों को कहो अपनी मर्दानगी संभाले पहले।
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