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शशि रंजन

शशि रंजन गणित विषय के एक शिक्षक हैं। स्कूल के दिनों से ही लिखने की रुचि ने इनकी कविता/कहानियों को कभी न्यूज़पेपर में तो कभी मैगज़ीन्स में स्थान दिया है। प्रतिलिपि और कुकू एफएम जैसे सोशल मीडिया पर भी इनकी कृतियाँ मौजूद हैं।

ग़ुरूर

पर्वतों ने तोड़ा है ग़ुरूर

नदियों की धाराओं को मोड़कर

या नदियों ने तोड़ा है ग़ुरूर

पर्वतों का सीना फोड़कर


हवाओं ने तोड़ा है ग़ुरूर

दरख़्तों को जमीं से उखाड़कर

या दरख़्तों ने तोड़ा है ग़ुरूर

हवाओं के वेग को पछाड़कर


युद्ध लड़े गए हैं

विजेताओं के निर्माण को

या विजेताओं ने जन्म दिया है

युद्ध के प्रमाण को


अंत घटित हुआ है

आरम्भ की राख पे

या आरंभ प्रस्फुटित हुआ है

अंत की शाख पे


वक़्त ने चुना है तुम्हे

अपनी कहानी सुनाने को

या तुमने चुना है वक़्त को

नए चरित्रों को दोहराने को

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